
कोसली (रेवाड़ी)। ग्राम कोसली स्थित बाबा मुक्तेश्वर पुरी आदेश समिति/ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं एवं प्रशासनिक लापरवाही के मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। एक जागरूक नागरिक द्वारा हरियाणा मानवाधिकार आयोग के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर आरोप लगाया गया है कि सक्षम अधिकारियों के स्पष्ट आदेशों के बावजूद आज तक मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने समय-समय पर ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं, सार्वजनिक धन के संभावित दुरुपयोग तथा प्रशासनिक अनियमितताओं के संबंध में संबंधित अधिकारियों को शिकायतें भेजीं। शिकायतों पर विचार करने के बाद आयुक्त, गुरुग्राम मण्डल ने आवश्यक कार्रवाई के आदेश जारी किए। इसके बाद उपायुक्त, रेवाड़ी ने अपने पत्र क्रमांक 321/पंचायत दिनांक 09 जनवरी 2026 के माध्यम से उपमण्डल अधिकारी (ना.), कोसली को निर्देश दिए कि आयुक्त के आदेशों की तत्काल अनुपालना सुनिश्चित करते हुए कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
शिकायत में कहा गया है कि इन निर्देशों के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके चलते आयुक्त, गुरुग्राम मण्डल ने पुनः अपने पत्र क्रमांक एसएम-1476/161-12/आर.ए./2026 दिनांक 08 अप्रैल 2026 के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई करने तथा शिकायतकर्ता को कार्रवाई से अवगत कराने के निर्देश दिए। आरोप है कि इसके बावजूद आज तक न तो आदेशों की प्रभावी अनुपालना हुई और न ही शिकायतकर्ता को अंतिम कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराई गई।
₹80–90 लाख के कथित गबन की जांच का मामला
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि इस प्रकरण से संबंधित एफआईआर संख्या 169/2014, थाना कोसली पहले से दर्ज है, जिसमें लगभग ₹80–90 लाख के कथित गबन के आरोपों की जांच का विषय रहा है। इसके अतिरिक्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 तक के वित्तीय अभिलेखों के ऑडिट के आदेश भी जारी किए जा चुके हैं, लेकिन अब तक निष्पक्ष एवं अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आए हैं।
मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप
मानवाधिकार आयोग को दी गई शिकायत में कहा गया है कि सक्षम अधिकारियों के आदेशों के बावजूद लंबे समय तक कार्रवाई न होना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 21 के तहत प्राप्त अधिकारों का उल्लंघन है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण उन्हें लगातार मानसिक तनाव, असुरक्षा एवं उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है तथा उनकी शिकायत पर समयबद्ध कार्रवाई की वैध अपेक्षा की अनदेखी की गई है।
आयोग से की गई प्रमुख मांगें
शिकायतकर्ता ने हरियाणा मानवाधिकार आयोग से मामले को मानवाधिकार उल्लंघन के रूप में दर्ज करने, उपायुक्त रेवाड़ी, एसडीएम कोसली एवं अन्य संबंधित अधिकारियों से विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट तलब करने, आदेशों की अनुपालना न होने के कारणों की जांच कराने तथा वर्ष 2014-15 से 2025-26 तक के वित्तीय अभिलेखों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच/ऑडिट सुनिश्चित कराने की मांग की है।
इसके साथ ही यदि किसी अधिकारी द्वारा आदेशों की अवहेलना, प्रशासनिक लापरवाही अथवा वित्तीय अनियमितताओं को संरक्षण देना पाया जाता है तो उसके विरुद्ध विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई की अनुशंसा करने तथा शिकायतकर्ता को जांच की प्रत्येक प्रगति एवं अंतिम निर्णय की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है।
मामले को लेकर अब यह देखना होगा कि संबंधित विभाग एवं मानवाधिकार आयोग इस शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं और लंबे समय से लंबित बताए जा रहे इस प्रकरण में आगे क्या कार्रवाई होती है।

